Saturday, April 25, 2020

On April 10, Due to the negligence of officials of Reliance #Sasan Ultra Mega Power Project #Singrauli Flyash Dyke breached, resultantly 6 persons including 3 minor children died & hundreds of cattle swept away & died. The bodies of victims recovered after so many days. Houses of villagers, standing Crop swept away in the ash slurry & Toxic Residue of Lakhs of Matric Ton. The said slurry contaminated the only drinking water body of the area called “ #RihandReservoir” which is lifeline of 30 Lakh People.

It is very unfortunate that despite repeated notices issued from Pollution Control Board, National Green Tribunal & District Administration to repair the damaged ash Dyke & also direction to stop storing further #Flyash, Toxic in the Dyke, the CEO of #Reliance Power Ltd & others overlooked the damage & kept throwing the same without fixing the problem. And resultantly, the ash dyke breached & many died, cattle swept away, houses destroyed, poultry farm etc swept away & lakhs of MT toxic residue, sewage travelled in the Rihand Sagar & contaminated the only water body for survival of 30 lakhs people.

Students, youth, common man protesting & demanding action & showing their anguish through posters, banners, writing on social media demanding criminal #FIR against the CEO & other responsible officials of #Reliance_Power_Ltd being prima facie responsible for the death of innocent villagers.

Due to #Covid19 Pandemic there is complete lockdown, hence people of the area symbolically protesting on social media by writing slogans, sharing posters, banners demanding action against the culprit. Interesting is that a highly polluted plant is running still generating ash. No action at all.

Today is 15th day of the said incident & despite the complaints filed by villagers the local administration has not registered any FIR for culpable homicide against the CEO & all as the said unfortunate incident occurred because of the criminal intent of Aforementioned officials.

#Singrauli
#SingrauliPollution
#Sonebhadra
#ArrestCEO









संसार में छल और कपट से बड़े भाइयो का हक खाते आये है छोटे भाई 
हाँ जी सुनने में थोड़ा अटपटा परंतु परम सत्य , सीधे और सच्चे बने रहना जीवन को नरक बनाने के समान है पिछले कुछ दिनों आत्हत्या की घटनाये सामने आई है जिसमे बड़े भाई जो कि जिम्मेदारी समझ लगातार पूरे परिवार को साथ लेकर आगे बढ़ते रहे अपनी अधेड़ उम्र पर आ कर जिस परिवार के लिए उन्होंने अपना जीवन लगाया वही परिवार और उनके खास छोटे भाई द्वारा पूरे परिवार को गुमराह कर अपना वर्चस्व स्थापित करने मात्र की लालसा में बड़े भाई के प्रति भड़काने और नीचा दिखाने के लिए हर नीच हरकत पर उतर आए यहां तक बड़े भाइयो को इतना अपमानित और कमजोर कर दिया गया कि वे आत्महत्या पर विवश हो गए ।                1 वर्ष पूर्व वृन्दावन मथुरा में राजू भारती जो प्रमुख उद्योग पति एवम नेता भी थे बेहद मिलन सार और सामाजिक व्यक्ति रहे उन्होंने छोटे भाई एवम परिवार से तंग आकर आत्महत्या करली । पूरा मथुरा जनपद एवम उन्हें जानने वाले इस घटना से स्तब्ध रह गए । उनके भाई के द्वारा उनका अपमान किया गया जो कि उनको आत्महत्या करने पर मजबूर करने की ओर इशारा करता है । तमाम मीडिया के साथियो ने आवाज उठानी चाही परंतु उन्हें न्याय नही मिल सका । आदमी के मरने के बाद कैसा न्याय जब व्यक्ति जिंदा होता है तब तो न्याय मिल नही पाता मरणोपरांत को न न्याय देगा ?
          इसी प्रकार की घटना पानीपत में हाल ही में सामने आई है जहां छोटे भाई ने अपनी चतुराई से माता को अपने पक्ष में कर बड़े भाई को घर से निकलवाया और उसे जायदाद से बेदखल करने की साजिश रची यह षड्यंत्र वर्षो से चलता रहा अंत मे बड़ा भाई हार गया और उसने अपने 5 वर्षीय पुत्र 9 वर्षीय पुत्री एवम अपनी पत्नी को लायसेंसी रिवाल्वर से गोली मार दी इसके बाद स्वयम को गोली मारकर जीवन लीला समाप्त कर ली । पत्नी के घर वालो ने इस पूरी घटना पर से पर्दा हटाया । परंतु न्याय मिलना मुश्किल नजर आ रहा है ।
                इस प्रकार के प्रकरणों को देख कर लगता है इन हत्याओं के दोषी वे माता पिता होते है जो स्वयम निर्णय नही ले पाते चमचागिरी और चाटुकारिता घर मे भी हावी हो जाती है । जो बेटा कुछ कार्य और सेवा ना कर झूठा दिखावा करता है सिर्फ और सिर्फ खुद को स्थापित करने के उद्देश्य से बड़े बेटे का वैभव यश कीर्ति से जलन के कारण उसे नीचा गिराने उसे कमजोर करने की पुरजोर कोशिश करता है माता पिता उसकी कठपुतली बन जाते है । इसमें बहुत बड़ा रोल घर की बेटियों का होता है जो छोटे भाई को अपना प्यारा भाई समझ कर बड़े भाई ले सारे कार्यो को भूल उसे स्थापित करने में लग जाती है ।
          इन हत्याओं के पीछे बड़े भाइयो को नीचा दिखाने कमजोर करने में सहयोग करने वाले रिस्तेदार सगे संबंधी सभी जिम्मेदार होते है। ऐसे लोगो के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर कार्यवाही होनी चाहिए।
          ये लोग मानवता के नाम पर धब्बा होते है क्योंकि यह लोग परिवार के परिवार को नष्ट करने में उनके हस्ती खेलती जिंदगी को नरक बनाने में बेहद खुशी महसूस करते है अपनी जिंदगी खुशहाली से जीते है । दूसरे कमजोर पड़ रहे घर के सदस्य को नीचा दिखाने एवम उसे और ज्यादाकामजोर करने में आत्म संतुष्टि प्राप्त करते है यही उनका स्वप्न होता है। यह लोग ऐसा व्यवहार करते है जैसे कोई प्रतिशोध ले रहे हो।
जब कि सत्यता यह होती है यह वे लोग होते है जो किसी के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ नही बोल पाते कभी किसीकी मदद नही कर सकते । अपनी ही मदद नही कर सकते। डरपोक होते है । अपने आपको बेहद चतुर कहते है और अपने नजदीकी को सामने मीठा बोल उसकी पीठ में छुरा घोंपने की योजना बनाते है।
              शायद आप लोगो यह बात अच्छी नही लग रही होंगी परंतु यह सत्य है अकाट्य सत्य । सामने शराफत का मुखोटा पहने यह लोग नाग नागिन से कम नही होते जो भूख लगने पर अपने ही बच्चों को खा जाते है।

               जी हाँ ऐसी ही कहानी एक समाजसेवी महत्वाकांशी युवा की है जिसने एक गरीब परिवार में जन्म लिया। पढ़े लिखे माता पिता परंतु गरीब किसान । पिता के भाई पढ़ लिख कर सरकारी सेवाओं में संलग्न हो अच्छा जीवन यापन करने लगे ।
        इस परिवार का बड़ा पुत्र जिसका जन्म 1981 में हुआ  5 वर्ष की आयु में अपने बड़े ताऊ के पास पड़ने भेजा गया । वहां जाकर जैसे रहा वैसे रहा बचपन में ही वापस आया कक्षा 6 से ही कुछ समझदारी आने पर अपने गरीब माता पिता को गरीबी से चटकारा दिला अपनी बहनों कोअच्छी शिक्षा  अच्छी शादी कर अच्छे परिवार में भेजने के लिए सोचने लगा । कक्षा 12 तक पहुंचते पहुंचते खेती बाड़ी ट्रेक्टर चलना काम करके अपने पिता का सहयोग करने में लग गया । वर्ष 1999 में स्नातक में आते आते देश समाज के संबंध में सोचते हुए उसने अपने गांव के विकास की योजना बनाई बड़े ताऊजी से सहयोग लेकर  संघर्ष कर पैदल घूम घूम कर एक संस्था बनाई। वर्ष 2000 में गांव के विकास के लिए कक्षा 1 से 5 एवम 9से 10 तक विद्यालयो की स्थापना की बेहद तल्लीनता के साथ शिक्षा प्रदान की , अपनी शिक्षा के साथ साथ ही संस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।  स्नातक करने के पश्चात परास्नातक किया जिसके करते ही देश मे व्याप्त अन्याय अत्याचार भर्ष्टाचार के विरुद्ध अभियान शुरू किया युवाओ को जागरूक भी करने लगा। जAगरुक युवा संगठन भारत की स्थापना की। युवाओ से नाशे से दूर रहने का आह्वाहन एवम खाली समय का उपयोग अच्छे कार्यो में करने का संदेश देने लगा ।  सामाजिक कार्यो के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों में भी संगन रहा उसके 3 बहने जो कि छोटी थी भाई 11 साल छोटा  जिन्हें वह सारी सुविधाएं मुहैया कराने में लगा रहा । विद्यालय भी गांव के अनेक छात्रों का भविष्य निर्माता बना। वर्ष 2006 में विद्यालय को कक्षा 11 12 के संचालन की अनुमति मिली । साथ ही दिन रात की मेहनत से माता पिता की गरीबी भी चली गयी उल्टा वह समृद्ध हुए । बड़े बेटे के हर निर्णय मे साथ भी रहे ।अब भ्रष्टाचार  के विरुद्ध भी लड़ाई लड़नी थी उसने अब वर्तमान  व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू किए । लोगो को न्याय दिलाने शुरू किया जिससे उसकी ख्याति बढ़ने लगी ।  परंतु यह क्या  ज्यो ज्यो छोटा बेटा बड़ा हुआ । माता पिता और बड़े बेटे के बीच खाई पैदा होना शुरू हो गया । बड़ा भाई जुटा रहा इन सब चीजों से अन्विज्ञ बेखबर बहनो की शादियां धूमधाम से की,
जिसकी कल्पना माता पिता ने सपनो में भी ना की हो ऐसी शादियां हुई । शिक्षा के लिए छोटे भाई को कही बाहर नही भटकना पड़ा कम्प्यूटर से लेकर खेलने के हर सामान सब भाई को उपलब्ध कराए । 12 वी के उपरांत ही छोटे भाई को सिविल सर्विस की परीक्षा पास करने के लिए प्रेरित किया ।परंतु मूर्ख को क्या पता था कि यही भाई उसके लिए सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरने वाला है ।
यही छोटा भाई और बहने लगातार एक षड्यंत्र रचती रही पीठ पीछे भाई के बाद रहे सामाजिक दायरे से जलन । प्रसिद्धि से जलन और द्वेष एवम छोटे भाई को स्थापित करने की योजना बनाने लगी । माता पिता के अंदर बड़े भाई के प्रति नफरत भरनेका कार्य लगातार जारी रहा ।
2008 में बड़े भाई की शादी हुई । जिसके बाद घर मे और अधिक विवाद गहराने लगे ।
    वर्ष 2009 बड़े भाई को घर से रहने पर विवश कर दिया गया ।
2009 में बड़े भाई को माता पिता से नफरत भारी उल्टी सीधी बाते कहलवाया गया । वह घर से जाने पर विवश हो गया वह भी खाली हाथ । घर से कोई सहयोग नही मिहला । 2009 में सहयोग धर्मार्थ चिकित्सालय की स्थापना की। मोतियाबिंद के निशुल्क ऑपरेशन कराये। एक सरकारी प्रोजेक्ट के तहत कार्य किया ।
2 वर्ष बाद माता पिता द्वारा पुनः इमोशनल ड्रामा कर पुनः वापस बुलाया गया।
वर्ष 2011 में विद्यालय  की स्थिति नाजुक थी जिसे सम्भालने के लिए विद्यालय को आधुनिकीकरण किया । फर्नीचर , विद्युतीकरण , सीसीटीवी कैमरे , झूले आदि से विद्यालय सुसज्जित किया। इस सबके लिए धन का कोई सहयोग माता पिता के द्वारा नही मिला । बड़े बेटे ने स्वयम इसकी व्यवस्था कर यहसारे कार्य कराए ।  गांव गांव संपर्क किया । जिससे अच्छे परिणाम मिले। साथ ही डिस्टेंस एजुकेशन के डिग्री डिप्लोमा  कोर्सेज भी शुरू कराये गए ।
             जैसे ही परिणाम मिलना शुरू हुए पिता जी विद्यालय के कॅश काउंटर पर आसीन हो गए । पिता के से एक दो बार आग्रह करने पर कि विद्यालय में बहुत पैसे लगे है हमे सुचारू रूप से संचालन करने दीजिए । पिता नही माने । बड़ा पुत्र पुनः वापस नाराज़ हो चला गया। अपने धर्मार्थ चिकित्सालय एवम संस्थाओ को संचालित करने लगा।
अब किसीने कभी उसकी कुशल क्षेम नही पूछी एवम किसी परेशानी में साथ नही आये । कोई खबर नही ली
          3 वर्ष बाद जब विद्यालय पूण खत्म होने के कगार पर आया तब पुनः फिर से विद्यालय की जिम्मेदारी दे दी गयी।
वर्ष2014 इस बार माता जी को आगे किया गया आने वाली फीस के लिए माता जी जाती और ले आती ।
          इस सब के बीच यह महत्व पूर्ण है कि खेती का सम्पूर्ण पैसा अन्य साधनों से होने वाली आय सदैव माता पिता के ही हाथ मे रही एक एक पैसे का हिसाब रहा और सदैव बड़े बेटे पर अनर्गल आरोप इनलोगो द्वारा लगाए जाते रहे।
        इनलोगो से षड्यंत्र के तहत पुनः बेटे को विद्यालय छोड़ने पर मजबूर कर दिया । वर्ष भर लगाई गयी लागत भी बेकार गयी जो कि अपनी जेब से लगानी होती है। सत्र के अंत मे गरीब छात्रों द्वारा दी जाती है जिसे पुनः माता पिता द्वारा रख लिया गया। अभी तक भी बड़ा बेटा परिवार को परिवार ही समझता रहा और चल  रहे गहरे षड्यंत्र को समझ नही पाया । इसके बाद भी कभी कोई सहायता नही की गई ।

        वर्ष 2017 जब विद्यालय पुनः खत्म होने की कगार पर आ गया छात्र संख्या नगण्य रह गयी भवन खाली रह गया भवन को देख बेहद दुख हुआ आर्थिक स्थिति से टूटा हुआ बड़ा पुत्र वहां सरकारी योजनाए लेकर आया पुनः उसमे प्राण फूंकने के प्रयास किये प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रारम्भ किया गया । जो कि सफल रहा ।
विद्यालय संचालन का उद्देश्य छोड़कर सिर्फ सामाजिक संस्थाओं के संचालन का मन बना चुके बेटे को पुनः इमोशनली मूर्ख बनाने पिता ने फिर चाल चली। प्यार से कहा कि विद्यालय संचालन करो। बार बार कहने पर बेटे का स्वप्न्न विद्यालय महाविद्यालय संचालन के क्षेत्र में बालक बालिकाओ का उत्थान था ही उसे द्रवित कर दिया और पिता द्वारा 5 लाख की सहायता की शर्त पर  पुनः विद्यालय संचालन के प्रयास तेज कर दिए।
          विद्यालय को पुनः जीवन्त करने के लिए स्वयम व उसकी पत्नी एवम नया स्टाफ दिन रात कड़कती धूप में संपर्क में रहे और विद्यालय जीवंत कर दिया ।
          विद्यालय जीवन्त होते ही धन की आवश्यकता पड़ने पर पुनः हाथ खड़े कर दिए गए क्योंकि इस बीच छोटे बेटे ने जिसे की आईपीएस की पढ़ाई हेतु बड़े भाई ने ही दिल्ली भेजा हुआ था डेरे गांव में डाले हुए थे । सिर्फ इस बात के लिए की भाई को पैसा ना दिया जाए।
बड़ा भाई अब भी नासमझ था क्योंकि वो अब भी अपना परिवार ही समझता था ।
इसके बाद पुनः बड़े भाई को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा ।
गांव छोड़ते ही छोटे बेटे को बुला विद्यालय का कार्य भर सौपा गया ।
यह मालूम पड़ने के बाद ही बड़े भाई की आंखे खुली कि क्या षड्यंत्र चल रहा था । साथ ही बहनो का भी बड़ा हाथ था कि भाई को पैसे ना दिए जाये।
     इस बीच माता पिता छोटा भाई बीमार हुए बड़े भाई और पत्नी ने दिन रात सेवा कर ये लोग जीवंत किये जिसके चलते एक बार 3 माह का पुत्र जो गर्भ में था वह खो दिया।
अन्य विप्पतिया आयी जिनमे बड़े बेटे ने हो आगे बढ़कर काम किया गांव की रंजिशें जिनमे बड़े भाई ने ही जान हथेली पर रख कर परिवार की जान बचाई । विद्यालय संचालन में भी अनेक बाधाएं होती है इन सबका सामना भी बड़े पुत्र ने ही किया।
अंत में बड़े पुत्र को आर्थिक तंगी सामाजिक दृष्टि से नीचा दिखाना उसका अस्तित्व उसका सपना खत्म कर्म पूरा षड्यंत्र किया गया।
अब ऐसे में क्या रास्ता बचता है ? या तो यह दुष्ट लोग जो इन तजार कर रहे है यह स्वयम खत्म हो जो कि पिछले 10 वर्षो से इनका स्वप्न चल रहा है। जीवन के  10 वर्ष एक दमदार सामाज सेवी । हमेशा सकारात्मक सोचने वाला। उसका जीवम ही इन लोगो ने खत्म कर दिया। यह इस छोटे भाई की अपना वर्चस्व स्थापित करने की चाहत या अपने भाई से जलन और द्वेष ।


Tuesday, April 14, 2020

Legal help for all

Rjys bharat ngo

Rjys bharat ngo provide legal advise and legal help for all. Who suffers from difficulties . The ngo provides honest advocate and help citizens win their disputes . Now days their is lot of cases pending in courts. Because of lake of knowledge or incapability . If victim is true we are help them . We short out their problem . Raise voice for provide justice.
This mission is soul of this ngo . Any body need help we provide and do all efforts for legally true matters. So many cases we are short out property matters, family matters, divorce cases. Marital matters. So many Cases ngo are solved before court or police station with the help of our efforts.


Registered your self and send us massage.

www.rjysorg.in

Monday, April 13, 2020

About Rjys bharat NGO

राष्ट्रीय जागरूक युवा संगठन

 मित्रो , 
             देश की वर्त्तमान  परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक है की कुछ ठोस कदम उठाये जाएँ  , देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए भगत  सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, राजगुरु,  बिस्स्मिल्ला खान जैसे लाखों लोग शहीद हो गये उनकी क़ुरबानी व्यर्थ ना जाने दी जाए |  आज हमें शहीद होने की आवश्यकता नहीं है आवश्यकता है तो सिर्फ एकजुट होकर बुराइयों का सामना करने की, आवाज उठाने की, इसी प्रयास के साथ आपका संगठन पूरे देश में सक्रिय रूप से कार्यरत है और आप सभी से आह्वान करता है कि संगठन से जुड़कर इसे और मजबूती प्रदान करें जिससे संगठन के लक्ष्यों को आसानी से हांसिल किया जा सके और एक नए भयमुक्त समाज की स्थापना की जा सके |संगठन विभिन्न वर्गों (जैसे- वकील,पत्रकार,महिला समाज सेवी ,युवा समाज सेवी ,किसान आदि) को सादर आमंत्रित करता है | युवा चाहे तो क्या नहीं कर सकता? लेकिन आवश्यकता है तो सिर्फ एकजुट होने की  तत्पश्चात सब कुछ संभव है |
           
 राष्ट्रीय जागरूक युवा संगठन क्या है?

          राष्ट्रीय जागरूक युवा संगठन एक गैर राजनैतिक संगठन है जो जाति धरम से ऊपर उठकर देश सेवा के लिए काम  करता है राष्ट्रीय जागरूक युवा संगठन की स्थापना उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में.. योगिराज श्रीकृष्ण भगवान के जनम स्थान में. हुई|देश भर में  समाज में फैली बुराइयों जैसे नशाखोरी, अपराध, अन्याय, अत्याचार एवं भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाने, युवाओं को संगठित कर योग्य और जागरूक युवाओं की सहायता से देश के विकास हेतु युवाओं को एकजुट करना उनमे आपसी सहयोग की भावना उत्पन्न करना प्रमुख उद्देश्य है |

         जागरूक युवा संगठन हर प्रकार के अन्याय,अत्याचार,,भ्रष्टाचार एवं बुराई जैसे महिलाओं के साथ हो रहे अपराध, बालश्रम , सरकारी कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, के विरुद्ध आवाज़ उठाने में गरीब असहाय को न्याय दिलाने में सहायता करता है  |    
सरकारी योज्नाओं का लाभ पत्र व्यक्तियों तक पहुँचाना , स्वरोजगार की स्थापना करने हेतु मार्गदर्शन करना |
अन्याय अत्याचार से पीड़ित गरीब असहाय की सहायता करना |

       राह से भटक रहे युवाओं को योग्य व् जागरूक युवाओं की सहयता से सही मार्ग पर लाना , नशाखोरी व् अपराधिक प्रवृति की ओर बाद रहे युवाओं को स्वरोजगार की स्थापना में मदद करना ओर सही दिशा देना  
महिलाओं के लिए  योग्य महिलाओं ओर युवतियों की सहायता से  महिला जागरूकता कार्यक्रम एवं महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना |
       सर्कार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को देश भर में राष्ट्रीय जागरूक युवा संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सहायता से क्रियान्वित करना |
       देश ओर समाज के विकास के लिए देश भर में नि:शुल्क प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करना , अस्पताल, 
 वृद्दाश्रम, अनाथाश्रम, महिला आश्रय सदन की स्थापना एवं सञ्चालन करना, राज्य सरकार , केंद्र सरकार के द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं को देश भर में क्रियान्वित करना

        राष्ट्रीय जागरूक युवा संगठन विभिन्न प्रकार के जागरूकता अभियान भी चलाता  है जैसे -                       वृक्षारोपण अभियान, भारतीय नागरिकों के कर्त्तव्य एवं अधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान, नशा उन्मूलन अभियान,जानलेवा बीमारियों के प्रति जागरूकता अभियान जैसे- (HIV AIDS, DENGUE, covid19 ETC.).

       संगठन को और मजबूत बनाने के लिये पेज के ऊपर दी गयी लिंक "JOIN RJYS" पर क्लिक करें और संगठन के सदस्यता फॉर्म में आवश्यक सूचना भरकर संगठन के सदस्य बनें हमें एक और देश भक्त का इन्तजार है .

अपहरण का प्रयास किया असफल

अपहृत बालक को अपहरणकर्ताओं से छुड़ाना पड़ा महंगा।
           वर्ष 2011, 13 जुलाई का वह दिन मुझे आज भी याद है जब लगभग 11 बजे दूर से बचाओ बचाओ चिल्लाने की आवाज आई आवाज महिलाओ की थी हमने अपने सहयोगियों को विद्यालय से बाहर भेजा और कहा पता करो क्या मामला है उन्होंने मोबाइल पर बताया महिलाये बता रही है कि आगे बदमाश है किसी बच्चे को पकड़कर लाया है हमने कहा आगे बढ़ो देखो और बताओ, वे बताये स्थान पर पहुंचे उन्होंने बताया बदमाश को एक पड़ोसी गांव के युवक महेश ने रोक रखा है बदमाश मरने मारने पर उतारू है हमने कहा पकड़कर लाओ बदमाश को। आदेश का पालन करते हुए दोनों शेर उस बदमाश को पकड़कर हमारे सामने लाये हमने पूछ ताछ की मामला संदिग्ध था बदमाश को पेड़ से बांधने का आदेश दे दिया बच्चे को अपने विद्यालय के कार्यालय में बिठाया पानी पिलाया पूछा कहा से हो यहा कैसे आये बच्चे ने जो गांव का नाम बताया वह 25 किलोमीटर दूर था वहां से वह बदमाश खेतो की पगडंडी पर होता हुआ यहा तक पहुंचा था बच्चा बोला रास्ते मे मुझे कोई दिखा नही और डर से इससे छूट कर भाग नही पाया यह मुझे मार देता , यहां ये भैया दिखे तो मैं रोने लगा युवक ने रोने का कारण पूछा तो बदमाश लड़ने लगा धमकाने लगा। तब यह चीखपुकार मची हमने बच्चे के पिता का नम्बर लिया वहां सूचना की पिता कही बाहर थे उन्होंने वहां से घर सूचना कर दी घर से बच्चे की माता जी का फोन आने लगा उन्हें पता बताया और कहा आ जाये यहां बच्चा सुरक्षित है नजदीकी थाने में सूचना भी दे दी ।
        इस बीच बदमाश के पकड़े जाने की सूचना आग की तरह आसपास क्षेत्र में फैल गयी । लोगो की भीड़ चारो तरफ से विद्यालय की ओर चली आई बड़े बुजुर्ग बालक नवयुवक युवतियां महिलाये जो भी सुने सब दौड़े चले आये विद्यालय में अंदर आकर सब उस बदमाश से अपने अपने तरीके से पूछताछ करने लगे । कुछ युवक मारपीट करने लगे हमने लोगो को समझाया कि पुलिस को सूचना दे दी गयी है वे लोग आ रहे होंगे वो अपना काम खुद कर लेंगे। परंतु भीड़ बढ़ती जा रही विद्यालय का मैन गेट बंद करा दिया गया अब लोग बॉउंड्री से कूद कर आने लगे विद्यालय की छतों पर चढ़ कर आने लगे क्योंकि हम सभी लोगो के प्यारे थे ही सोचा भैया तो अपने है ही। गांव के आसपास के सभी लोग परिवार की तरह ही रहते है सभी सुख दुख में साथ खड़े रहते है । हम सभी से हाथ जोड़कर निवेदनकर रहे थे हमारे पिता जी भी सभी से बोल रहे थे इस तरह भीड़ ना करो संख्या बढ़ती गयी 1000 से ज्यादा लोग विद्यालय पर थे पुलिस को 2 घण्टे हुए नही आ सकी इस बीच एस ओ बलदेव को 4 बार फोन कर बोल दिया कि यहां भीड़ है बहुत कंट्रोल से बाहर है जल्दी आओ। इधर बदमाश को आक्रोशित जनता से बचाना भी था क्योंकि पिताजी का कहना था मर गया तो हत्या  का आरोप लग जाएगा । अब उससे पीछा छुड़ाने को विद्यालय से बाहर कर दिया गया वहां ग्रामीणों ने और ज्यादा मारपीट करने का अवसर मिला फिर यह देख कर पुनः अंदर लाये अंदर आते ही जनता से सीधी झड़प हमारी होने लगी लोग समझने को तैयार नही भीड़ को समझना बहुत मुश्किल होता है वह भी जब जब आप बल का प्रयोग ना करे ।
             पूर्व में अनेक बार बल के प्रयोग से भीड़ को हिंसक लोगो को रोकने का अच्छा तजुर्बा था परंतु इस समय था कि प्रेम और शांति से काम हो जाए। यह आपदा अचानक आई थी जिसकी कोई तैयारी ना थी जो अपने लोग थे वे भी भीड़ में खो गए गिने चुने 3 लोग जिम्मेदार थे हम पिताजी और माँगेश चाचा सभी लोग अलग थलग अपने अपने तरीके से सब कुछ संभालने का प्रयास कर रहे थे इस बीच पुलिस की गाड़ी आयी दरोगा जी वही जमीन पर बैठकर बदमाश के बयान नॉट करने लगे हमने उठाया उन्हें और अपने साथ कार्यालय में बिठाया गांव के संभ्रांत लोगो को बुलाया बयान दर्ज कराए और कहा कि आप लेजाइये इस बीमारी को थाने से निपटाये सब इस बीच विद्यालय की छुट्टी करा दी गयी भीड़ और ज्यादा बढ़ गयी। बच्चे की माँ भी आ गयी । साथ मे बच्चे के ताऊ और आस पड़ोसी ।
          सब इंस्पेक्टर ऋषि पाल सिंह  एक सिपाही साथ मे एक ड्राइवर ये पुलिस फिरसे थी बस पब्लिक कहने लगी कि बच्चे को मा के सुपुर्द कर दिया जाए। इंस्पेक्टर साहब बोले सब थाने से ही होगा अब थाने जाना होगा पब्लिक के लोगो का कहना हुआ कि वहां पुलिस कुछ ले देकर बदमाश छोड़ देगी और माँ से पैसे वसूल करेगी परेशान करेगी यही बच्चे को मा के सुपुर्द किया जाए लोगो ने गाड़ी रोक ली वाकया विद्यालय के अंदर का है सब इंस्पेक्टर बोले भाईसाहब कुछ करो निकलवाओ यहां से हमने गेट खुलवा कर पुलिस की गाड़ी बाहर निकलवा दी और फिर गेट बंद कर दिया। फुरसत से बैठ गए इतने में बाहर से जयकारों की आवाज आई कुछ शोर शराबा अनहोनी की आशंका से गेट की तरफ दौड़े देखा गेट बाहर से बंद दौड़ कर सीढ़ियों से विद्यालय की छत पर गए तो नज़ारा शर्मसार करने वाला  था पुलिस की गाड़ी रुकी हुई थी गाड़ी के ठीक आगे रास्ता रोके मोटर साइकिल , उससे आगे ट्रेक्टर उससे आगे जुगाड़ आदि वाहन सड़क पर थे कुछ खींचातानी पुलिस के लोगो से होती दिखी यह देख कर मैं आग बबूला हो गया मेने तेज आवाज में कहा मूर्खो पागल हो गए हो जो लोग हमारी मदद के लिए आये तुम ये सलूक कर रहे हो कुछ युवक बोले क्या करे आप बताये हमने कहा रास्ता साफ करो और जाने दो ये हरकत हमे पसंद नही आई। सुनकर सभी ने रास्ता साफ करदिया गाड़ी निकल गयी परंतु वहां जो हुआ उसे हम इतना ही देख पाए जो वर्णित किया है।

       इसके बाद जो हुआ वह कल्पना के बाहर था हमारी विरोधी पार्टी हमे जाल में फसाने का इंतज़ार कर रही थी। वह थानों में संपर्क रखने वाले वहां के जाने माने व्यक्ति थे जिन्होंने पुलिस को हमारे प्रति भर कर तैयार किया। बलदेव थाने से 10 गाड़ी पुलिस बल हमारे विद्यालय के लिए रवाना हो चुका था। हमे यह सूचना हमारे किसी हमदर्द ने दी थी थाना 12 किलोमीटर दूर पड़ता है हम वही विद्यालय में अपने 5 लोगो के साथ मामले की चर्चा कर ही रहे थे कि सूचना आ गयी हम वही बैठे रहे इंतज़ार करते रहे।

       कार्यालय में दौड़ कर होमगार्ड रविकिरण आया भैया एस ओ साहब आये है बुला रहे है हमने कहा अंदर भेजो उन्हें । बोले गुस्से में है हमने कहा क्यों ? कोई बात नही अंदर भेजो पानी पिलाओ बात करते है हम फिर देखा कुछ और सिपाही जो बाहर बोल रहे थे कौन कौन थे ? ये था ये था ? यह सुनकर हमसे रुका नही गया हम उठकर बाहर फील्ड की तरफ आये हमने कहा कौन है भाई किस तरह बात कर रहे हो ? इस पर साथ आये सब इंस्पेक्टर ऋषिपाल बोले ये भाईसाहब है इन्होंने हमारा साथ दिया है इन्होंने बचाया है हमे। एस ओ बोले हमे फोन किसने किया और हमे यहां बुलवा कर पिटवाया गया है हमने बोला फोन हमने किया और 3 घण्टे बाद आप गाड़ी भेज पाए आपको बार बार बोला गया कि भीड़ ज्यादा है हम संभाल नही पा रहे आपने पुलिस बल भेजा नही अब आप पुकुस बल के साथ आये है उस समय 2 गाड़िया भी भेजी होती तो जो घटना हुई वह हुई ना होती और हमे तो मालूम भी नही किया मारपीट हुई है जैसा आप बता रहे है हमारेके सामने कुछ हुआ नही। बोले कौन कौन था आप ये बता दीजिए ?
हमने कहा भीड़ थी किसका नाम ले किसका नही आप गांव जाइये लोग देख रहे है उनमें से पकड़िए लोगो को पूछिये सबका नाम आ जाएगा सामने ।
       एस ओ साहब ने संजीव कुमार तोमर ने एक नया सुनी हमारे 2 चपरासियों को गाड़ी में बिठानेलगे ये लोग बताएंगे आप नही बता रहे तो हमने कहा किसी बदमाश को पकड़वाने का इनाम यह दे रहे ही आप हमें हमारे लोगो को लेजाकर हमे परेशान करना चाह रहे है वे बोले भाईसाहब हमे अपना काम करने दीजिए पूछताछ करके हम छोड़ देंगे।

नही माने और ले गए हमारे 2 लोगो को। बाकी आगे........