Monday, April 13, 2020

अपहरण का प्रयास किया असफल

अपहृत बालक को अपहरणकर्ताओं से छुड़ाना पड़ा महंगा।
           वर्ष 2011, 13 जुलाई का वह दिन मुझे आज भी याद है जब लगभग 11 बजे दूर से बचाओ बचाओ चिल्लाने की आवाज आई आवाज महिलाओ की थी हमने अपने सहयोगियों को विद्यालय से बाहर भेजा और कहा पता करो क्या मामला है उन्होंने मोबाइल पर बताया महिलाये बता रही है कि आगे बदमाश है किसी बच्चे को पकड़कर लाया है हमने कहा आगे बढ़ो देखो और बताओ, वे बताये स्थान पर पहुंचे उन्होंने बताया बदमाश को एक पड़ोसी गांव के युवक महेश ने रोक रखा है बदमाश मरने मारने पर उतारू है हमने कहा पकड़कर लाओ बदमाश को। आदेश का पालन करते हुए दोनों शेर उस बदमाश को पकड़कर हमारे सामने लाये हमने पूछ ताछ की मामला संदिग्ध था बदमाश को पेड़ से बांधने का आदेश दे दिया बच्चे को अपने विद्यालय के कार्यालय में बिठाया पानी पिलाया पूछा कहा से हो यहा कैसे आये बच्चे ने जो गांव का नाम बताया वह 25 किलोमीटर दूर था वहां से वह बदमाश खेतो की पगडंडी पर होता हुआ यहा तक पहुंचा था बच्चा बोला रास्ते मे मुझे कोई दिखा नही और डर से इससे छूट कर भाग नही पाया यह मुझे मार देता , यहां ये भैया दिखे तो मैं रोने लगा युवक ने रोने का कारण पूछा तो बदमाश लड़ने लगा धमकाने लगा। तब यह चीखपुकार मची हमने बच्चे के पिता का नम्बर लिया वहां सूचना की पिता कही बाहर थे उन्होंने वहां से घर सूचना कर दी घर से बच्चे की माता जी का फोन आने लगा उन्हें पता बताया और कहा आ जाये यहां बच्चा सुरक्षित है नजदीकी थाने में सूचना भी दे दी ।
        इस बीच बदमाश के पकड़े जाने की सूचना आग की तरह आसपास क्षेत्र में फैल गयी । लोगो की भीड़ चारो तरफ से विद्यालय की ओर चली आई बड़े बुजुर्ग बालक नवयुवक युवतियां महिलाये जो भी सुने सब दौड़े चले आये विद्यालय में अंदर आकर सब उस बदमाश से अपने अपने तरीके से पूछताछ करने लगे । कुछ युवक मारपीट करने लगे हमने लोगो को समझाया कि पुलिस को सूचना दे दी गयी है वे लोग आ रहे होंगे वो अपना काम खुद कर लेंगे। परंतु भीड़ बढ़ती जा रही विद्यालय का मैन गेट बंद करा दिया गया अब लोग बॉउंड्री से कूद कर आने लगे विद्यालय की छतों पर चढ़ कर आने लगे क्योंकि हम सभी लोगो के प्यारे थे ही सोचा भैया तो अपने है ही। गांव के आसपास के सभी लोग परिवार की तरह ही रहते है सभी सुख दुख में साथ खड़े रहते है । हम सभी से हाथ जोड़कर निवेदनकर रहे थे हमारे पिता जी भी सभी से बोल रहे थे इस तरह भीड़ ना करो संख्या बढ़ती गयी 1000 से ज्यादा लोग विद्यालय पर थे पुलिस को 2 घण्टे हुए नही आ सकी इस बीच एस ओ बलदेव को 4 बार फोन कर बोल दिया कि यहां भीड़ है बहुत कंट्रोल से बाहर है जल्दी आओ। इधर बदमाश को आक्रोशित जनता से बचाना भी था क्योंकि पिताजी का कहना था मर गया तो हत्या  का आरोप लग जाएगा । अब उससे पीछा छुड़ाने को विद्यालय से बाहर कर दिया गया वहां ग्रामीणों ने और ज्यादा मारपीट करने का अवसर मिला फिर यह देख कर पुनः अंदर लाये अंदर आते ही जनता से सीधी झड़प हमारी होने लगी लोग समझने को तैयार नही भीड़ को समझना बहुत मुश्किल होता है वह भी जब जब आप बल का प्रयोग ना करे ।
             पूर्व में अनेक बार बल के प्रयोग से भीड़ को हिंसक लोगो को रोकने का अच्छा तजुर्बा था परंतु इस समय था कि प्रेम और शांति से काम हो जाए। यह आपदा अचानक आई थी जिसकी कोई तैयारी ना थी जो अपने लोग थे वे भी भीड़ में खो गए गिने चुने 3 लोग जिम्मेदार थे हम पिताजी और माँगेश चाचा सभी लोग अलग थलग अपने अपने तरीके से सब कुछ संभालने का प्रयास कर रहे थे इस बीच पुलिस की गाड़ी आयी दरोगा जी वही जमीन पर बैठकर बदमाश के बयान नॉट करने लगे हमने उठाया उन्हें और अपने साथ कार्यालय में बिठाया गांव के संभ्रांत लोगो को बुलाया बयान दर्ज कराए और कहा कि आप लेजाइये इस बीमारी को थाने से निपटाये सब इस बीच विद्यालय की छुट्टी करा दी गयी भीड़ और ज्यादा बढ़ गयी। बच्चे की माँ भी आ गयी । साथ मे बच्चे के ताऊ और आस पड़ोसी ।
          सब इंस्पेक्टर ऋषि पाल सिंह  एक सिपाही साथ मे एक ड्राइवर ये पुलिस फिरसे थी बस पब्लिक कहने लगी कि बच्चे को मा के सुपुर्द कर दिया जाए। इंस्पेक्टर साहब बोले सब थाने से ही होगा अब थाने जाना होगा पब्लिक के लोगो का कहना हुआ कि वहां पुलिस कुछ ले देकर बदमाश छोड़ देगी और माँ से पैसे वसूल करेगी परेशान करेगी यही बच्चे को मा के सुपुर्द किया जाए लोगो ने गाड़ी रोक ली वाकया विद्यालय के अंदर का है सब इंस्पेक्टर बोले भाईसाहब कुछ करो निकलवाओ यहां से हमने गेट खुलवा कर पुलिस की गाड़ी बाहर निकलवा दी और फिर गेट बंद कर दिया। फुरसत से बैठ गए इतने में बाहर से जयकारों की आवाज आई कुछ शोर शराबा अनहोनी की आशंका से गेट की तरफ दौड़े देखा गेट बाहर से बंद दौड़ कर सीढ़ियों से विद्यालय की छत पर गए तो नज़ारा शर्मसार करने वाला  था पुलिस की गाड़ी रुकी हुई थी गाड़ी के ठीक आगे रास्ता रोके मोटर साइकिल , उससे आगे ट्रेक्टर उससे आगे जुगाड़ आदि वाहन सड़क पर थे कुछ खींचातानी पुलिस के लोगो से होती दिखी यह देख कर मैं आग बबूला हो गया मेने तेज आवाज में कहा मूर्खो पागल हो गए हो जो लोग हमारी मदद के लिए आये तुम ये सलूक कर रहे हो कुछ युवक बोले क्या करे आप बताये हमने कहा रास्ता साफ करो और जाने दो ये हरकत हमे पसंद नही आई। सुनकर सभी ने रास्ता साफ करदिया गाड़ी निकल गयी परंतु वहां जो हुआ उसे हम इतना ही देख पाए जो वर्णित किया है।

       इसके बाद जो हुआ वह कल्पना के बाहर था हमारी विरोधी पार्टी हमे जाल में फसाने का इंतज़ार कर रही थी। वह थानों में संपर्क रखने वाले वहां के जाने माने व्यक्ति थे जिन्होंने पुलिस को हमारे प्रति भर कर तैयार किया। बलदेव थाने से 10 गाड़ी पुलिस बल हमारे विद्यालय के लिए रवाना हो चुका था। हमे यह सूचना हमारे किसी हमदर्द ने दी थी थाना 12 किलोमीटर दूर पड़ता है हम वही विद्यालय में अपने 5 लोगो के साथ मामले की चर्चा कर ही रहे थे कि सूचना आ गयी हम वही बैठे रहे इंतज़ार करते रहे।

       कार्यालय में दौड़ कर होमगार्ड रविकिरण आया भैया एस ओ साहब आये है बुला रहे है हमने कहा अंदर भेजो उन्हें । बोले गुस्से में है हमने कहा क्यों ? कोई बात नही अंदर भेजो पानी पिलाओ बात करते है हम फिर देखा कुछ और सिपाही जो बाहर बोल रहे थे कौन कौन थे ? ये था ये था ? यह सुनकर हमसे रुका नही गया हम उठकर बाहर फील्ड की तरफ आये हमने कहा कौन है भाई किस तरह बात कर रहे हो ? इस पर साथ आये सब इंस्पेक्टर ऋषिपाल बोले ये भाईसाहब है इन्होंने हमारा साथ दिया है इन्होंने बचाया है हमे। एस ओ बोले हमे फोन किसने किया और हमे यहां बुलवा कर पिटवाया गया है हमने बोला फोन हमने किया और 3 घण्टे बाद आप गाड़ी भेज पाए आपको बार बार बोला गया कि भीड़ ज्यादा है हम संभाल नही पा रहे आपने पुलिस बल भेजा नही अब आप पुकुस बल के साथ आये है उस समय 2 गाड़िया भी भेजी होती तो जो घटना हुई वह हुई ना होती और हमे तो मालूम भी नही किया मारपीट हुई है जैसा आप बता रहे है हमारेके सामने कुछ हुआ नही। बोले कौन कौन था आप ये बता दीजिए ?
हमने कहा भीड़ थी किसका नाम ले किसका नही आप गांव जाइये लोग देख रहे है उनमें से पकड़िए लोगो को पूछिये सबका नाम आ जाएगा सामने ।
       एस ओ साहब ने संजीव कुमार तोमर ने एक नया सुनी हमारे 2 चपरासियों को गाड़ी में बिठानेलगे ये लोग बताएंगे आप नही बता रहे तो हमने कहा किसी बदमाश को पकड़वाने का इनाम यह दे रहे ही आप हमें हमारे लोगो को लेजाकर हमे परेशान करना चाह रहे है वे बोले भाईसाहब हमे अपना काम करने दीजिए पूछताछ करके हम छोड़ देंगे।

नही माने और ले गए हमारे 2 लोगो को। बाकी आगे........



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